सिब्बल बोले- केंद्र का रवैया यही रहा तो CVC और EC का भी यही हश्र होगा
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा की याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान आलोक वर्मा के वकील फली नरीमन ने दलील दी कि कमेटी की सिफारिश पर ही सीबीआई डायरेक्टर नियुक्त किया जाता है. डायरेक्टर का कार्यकाल न्यूनतम दो साल होता है. अगर इस दौरान असाधारण हालात में सीबीआई निदेशक का ट्रांसफर किया जाना है तो कमेटी की अनुमति लेनी होगी. लंच के बाद फिर से शुरू हुई बहस में दुष्यंत दवे ने कहा कि सीबीआई के फैसलों में सीवीसी या फिर सरकार जैसे किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं होना चाहिए. दवे के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से कपिल सिब्बल ने बहस की. सिब्बल ने कहा कि सीवीसी और सरकार एक्ट की अनदेखी और मनमानी कर सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर नहीं भेज सकती. नियुक्ति और हटाने या निलंबन के आदेश सिर्फ सेलेक्शन कमेटी कर सकती है. ये मामला कमेटी के पास भेजना था. अगर ऐसे फैसलों और प्रक्रिया को हम मंज़ूर करेंगे तो सीबीआई की स्वायत्तता का क्या मतलब रह जाता है? अगर कमेटी के अधिकार सरकार हथिया लेगी तो जो आज cbi निदेशक के साथ हो रहा है, वही कल CVC और ECI के साथ भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि ट्...